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Vanijya Paribhasha Kosh (English-Hindi) (CSTT)

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1.बीमा-किश्त, प्रीमियम 2. बढ़ौती 3. इनाम 4. अधिवेतन
1.बीमा-किश्त, प्रीमियम : किसी सेवा अथवा संरक्षण आदि के लिए नियमित अंतरालों पर दी गई धनराशि जैसे, बीमा संरक्षण के लिए बीमादार द्वारा बीमा कंपनी को दी जानेवाली रक़में।
2. बढ़ौती : अंकित मूल्य से ऊपर अदा की जाने वाली राशि जैसे, यदि किसी बॉन्ड, शेयर अथवा प्रतिभूति का बाज़ार-मूल्य उसके अंकित मूल्य से अधिक है तो यह अधिक राशि उसकी ‘बढ़ौती’ कहलाएगी।
3. इनाम : किसी वस्तु अथवा उत्पाद के साथ कटौती-कूपन अथवा अन्य कोई वस्तु मुफ़्त देना। यह उत्पाद अथवा वस्तु को लोकप्रिय बनाने तथा उसकी ज़्यादा से ज़्यादा बिक्री करने हेतु किया जाता है।
4. अधिवेतन : नियमित मज़दूरी अथवा वेतन के अतिरिक्त किसी धनराशि का भुगतान। यह पैसा कर्मचारी को असाधारण कुशलता अथवा योग्यता, काम की पेचीदगी तथा उसकी ख़तरनाक प्रकृति अथवा समयोपरि या छुट्टी के दिनों में किए गए काम को ध्यान में रखते हुए दिया जाता है।

Price

क़ीमत, दाम
किसी वस्तु अथवा सेवा की एक इकाई ख़रीदने के लिए क्रेता द्वारा देय धनराशि। दूसरे शब्दों में, किसी वस्तु अथवा सेवा के विनिमय-मूल्य की मुद्रा में अभिव्यक्ति।

Principal

1. मालिक 2. मूलधन
1. मालिक : किसी व्यवसाय को चलाने वाला अथवा उसका स्वामी; साझेदारी फ़र्म का साझेदार; वह व्यक्ति जो अपना अभिकर्ता नियुक्त करता है।
2. मूलधन : किसी जमा अथवा कर्ज़ की वह मौलिक अंकित राशि जिस पर ब्याज लगाया जाता है।

Private company

निजी कंपनी, प्राइवेट कंपनी
कंपनी अधिनीयम, 1956 की धारा 3 के अनुसार ‘निजी कंपनी’ से आशय ऐसी कंपनी से है जिसने अपने अंतर्नियमों द्वारा (1) अपने शेयरों के हस्तांतरण पर प्रतिबंध लगाया हुआ है; (2) जिसके सदस्यों की संख्या 50 से अधिक नहीं हो सकती (इसमें वे सदस्य शामिल नहीं हैं जो कंपनी के भूतपूर्व या वर्तमान कर्मचारी हैं); और (3) जो अपने शेयरों और डिबेंचरों को ख़रीदने के लिए जनता को आमंत्रित नहीं करती।
प्रत्येक निजी कंपनी के नाम के अंत में ‘प्राइवेट लिमिटेड’ शब्दों का प्रयोग अनिवार्य है।
तुल. दे. public company

Private sector

निजी क्षेत्रक
अर्थव्यवस्था का वह क्षेत्र जो निजी उद्यम के हाथों में है।
तुल. दे. public sector

Proceeds

आगाम, आय, प्राप्ति
अ – किसी सौदे से वसूल होने वाली निवल धनराशि।
आ – रूक़्क़ा, हुंडी आदि उधार-प्रपत्र को उसकी परिपक्वता-तिथि से पहले ही भुनाने पर धारक को मिलने वाली निवल रक़म।

Producer’s goods

उत्पादक वस्तुएँ, उत्पादक माल
दे. capital goods

Product differentiation

उत्पाद-विभेदन
एक ही प्रकार की वस्तुओं के बीच वास्तविक या काल्पनिक भेद का सर्जन। ऐसा प्रायः पैकिंग, डिब्बाबंदी, ब्रान्ड विभेद, क़िस्म विभेद, डिज़ाइन विभेद आदि विधियों को अपना कर दिया जाता है। उपभोक्ता-वस्तुओं के संबंध में यह अधिकतर देखने में आता हैं। अपनी वस्तु का एक निश्चित बाज़ार बनाने के लिए उत्पादक ऐसा करते हैं।

Productivity

उत्पादिता, उत्पादकता
श्रम, पूँजी अथवा दोनों की एक इकाई से समय की एक निश्चित इकाई के दौरान उत्पादित वस्तुएँ या सेवाएँ।

Profit

लाभ
दे. gross profit, net profit

Profit and loss account

लाभ-हानि लेखा
वार्षिक (या अन्य अवधि के) लेखा-संवरण के दौरान प्रतिष्ठान का निवल लाभ या हानि ज्ञात करने के लिए तैयार किया गया एक लेखा जिसमें आय और व्यय के लेखाओं की बाक़ियाँ उतार ली जाती हैं। इस लेखे में जमा की तरफ़ का जोड़ अधिक हो तो इसका अर्थ है कि प्रतिष्ठान लाभ में और नामे की तरफ़ का जोड़ अधिक हो तो नुक़सान में हैं।

Profit-sharing

लाभ-सहभाजन
उत्पादिता में वृद्धि करने के उद्देश्य से प्रतिष्ठान के लाभ में कर्मचारयों की हिस्सा-बँटाई।

Progressive tax

प्रगामी कर, वर्धमान कर, आरोही कर
वह कर जिसके अंतर्गत कर की दर कर के आधार की वृद्धि के साथ बढ़ती जाती है। यथा, आयकर के प्रसंग में, करदाता की आय जितनी ही अधिक होगी उस आय का उतना ही अधिक अनुपात वह कर के रूप में देगा।
तुल. दे. regressive tax

Promissory note

रूक़्क़ा, प्रोनोट, वचन-पत्र
एक निर्दिष्ट तिथि पर एक निर्दिष्ट राशि को चुकाने के वायदे का लिखित परक्राम्य प्रपत्र।

Promoter

प्रवर्तक
ऐसा व्यक्ति जो उद्यम की परिकल्पना करता है, उससे संबंधित जानकारी इकट्ठा करके विश्लेषण करता है, उसके लिए आरंभिक वित्तीय व्यवस्था करता है और कंपनी के निर्माण की प्रारंभिक औपचारिकताएँ पूरी करता है।

Proposal

प्रस्ताव
अ – ऐसा प्रारंभिक विचार अथवा वचन जो एक वैध संविदा का आधार बनता है।
आ – बीमा कराने के इच्छुक व्यक्ति द्वारा कंपनी के समक्ष प्रस्तुत प्रार्थनापत्र।

Prospectus

विवरण पत्रिका, परिचायिका, माहिती (मराठी)
शेयर जारी करते समय कंपनी द्वारा अपनी वित्तीय स्थिति, कार्यकलापों, नई योजनाओं आदि के बारे में यथाविधि जानकारी देने के लिए प्रकाशित किया गया ब्योरा।

Protective duty

संरक्षण शुल्क
जब घरेलू उत्पादनकर्ताओं को संरक्षण देने के लिए आयातित वस्तुओं पर सीमा शुल्क लगाया जाता है तो वह संरक्षण शुल्क कहलाता है। इस प्रकार का शुल्क विदेशी वस्तुओं को अपेक्षाकृत महँगा करने के लिए लगाया जाता है ताकि घरेलू उत्पादों की खपत बढ़ सके।

Protesting

1. नकार-प्रमाणन, प्रोटेस्ट करना 2. संकट-प्रमाणन
1. नकार-प्रमाणन, प्रोटेस्ट करना : नोटरी पब्लिक द्वारा हुंडी के ऊपर इस आशय की टिप्पणी देना कि हुंडी अदाकर्ता को यथा समय भुगतान के लिए पेश की गई किंतु उसने भुगतान करने से इन्कार कर दिया। अदाकर्ता द्वारा भुगतान नकार देने पर पृष्ठांकिती अथवा धारक औपचारिक कार्रवाई के रूप में हुंडी को नोटरी के सुपुर्द कर देता है जो उसे एक बार फिर अदाकर्ता को पेश करता है और उसके द्वारा भुगतान करने से इन्कार किए जाने पर उक्त आशय का प्रमाणपत्र हुंडी पर लिख देता है या उसके साथ नत्थी कर देता है।
2. संकट-प्रमाणन : यात्रा के दौरान दुर्घटना होने के बाद जहाज़ के पत्तन में पहुँचने पर उसके कप्तान द्वारा अधिकारियों को दिया गया तत्संबंधी लिखित वक्तव्य जिसमें जहाज़ अथवा माल को हुई हानि का ब्यौरा प्रस्तुत किया जाता है और यह प्रमाणपत्र होता है कि दुर्घटना कप्तान और उसके अधिकारियों की असावधानी से नहीं बल्कि दैवी संकट के कारण हुई है।

Public company

सार्वजिक कंपनी
सार्वजिक कंपनी’ से आशय ऐसा कंपनी से है जो निजी कंपनी नहीं है और जिसके अंतर्नियमों के अनुसार उसकी सदस्यता जनता के लिए खुली है। सदस्यों की संख्या सात और अधिक से अधिक चाहे जितनी हो सकती है। सार्वजनिक कंपनी विवरण-पत्रिका जारी करके जनता को अपने शेयर और डिबेंचर लेने के लिए आमंत्रित कर सकती है।
तुल. दे. private company

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