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Definitional Dictionary of Philosophy (English-Hindi) (CSTT)

Commission for Scientific and Technical Terminology (CSTT)

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Trinity

त्रिरूपेश्वर, त्रिमूर्ति, त्रयी
ईसाई धर्मावलंबियों की एक मान्यता के अनुसार, ईश्वर, जो पिता, पुत्र और पवित्र आत्मा के रूपों में तीन पक्षों या व्यक्तियों का समवाय है, यद्यपि एक द्रव्य के रूप में वह अखंड है।

Truth

1. सत्यता : कथनों, प्रतिज्ञप्तियों तथा प्रत्ययों की वह विशेषता जो उनकी वस्तु-अनुरूपता, पारस्परिक संगति अथवा अर्थक्रियाकारित्व के फलस्वरूप उत्पन्न होती है।
2. सत्य : सत्य प्रतिज्ञप्ति या वाक्य।

Tychism

अनियत घटनावाद, संयोगवाद
वह मत कि विश्व में कोई घटना कारणों के द्वारा नियत नहीं है : सभी कुछ यादृच्छिक है विशेषतः पर्स (Peirce) के अनुसार, यह सिद्धांत कि संयोग विश्व में क्रियाशील एक वस्तुगत सत्ता है।

Ultimate Reality

परमसत्, परमतत्त्व
वह निरपेक्ष तत्त्व, जो समस्त अस्तित्व का आधार एवम् अधिष्ठान है तथा जिससे सम्पूर्ण आस्तित्त्व उत्पन्न अथवा उद्भूत माना जाता है।

Ultramontanism

पोप-सर्वाधिपत्यवाद
रोमन कैथोलिक चर्च में, विशेषतः फ्रांस में, मान्य वह सिद्धांत कि धार्मिक मामलों में ही नहीं अपितु राजनीतिक बातों में भी पोप सर्वोच्च प्रमाण है।

Uncertainty Principle

अनिश्चितता-सिद्धांत
परमाणु-भौतिकी का एक सिद्धांत जिसे हाइज़ेनबर्ग-सिद्धांत भी कहते हैं। इसके अनुसार परमाणु के अवयवों (इलेक्ट्रॉन इत्यादि) की स्थिति और वेग दोनों की एक ही क्षण में यथार्थ माप असंभव है। दर्शन में कारण-सिद्धांत के खंडन और अनियतत्त्ववाद के समर्थन का प्रायः इस सिद्धांत के आधार पर दावा किया जाता है। परन्तु यह द्रष्टव्य है कि प्रश्नाधीन अनिश्चितता स्थिति और वेग के बारे में नहीं है बल्कि उनकी यथार्थ माप के बारे में है।

Understanding

बोध, समझ
कांट के अनुसार, मन की तीन शक्तियों में से एक : वह जो प्रागनुभविक संप्रत्ययों या ‘पदार्थों’ की सहायता से संवेदनों “को निर्णयों के रूप में व्यवस्थाबद्ध करती है।” अन्य दो शक्तियाँ हैं : संवेदन-शक्ति तथा तर्कबुद्धि।

Unitarianism

ईश्वरैक्यवाद
ईसाई धर्म के प्रोटेस्टेट संप्रदाय में प्रचलित वह सिद्धांत जो त्रिरूपेश्वर (Trinity) का विरोध करता है और ईश्वर के एकत्व पर बल देता है।

Universal

सामान्य
प्रत्यय जो अनेक विशेषों में समान रूप में विद्यमान होता है, जैसे नीलत्व या मनुष्यत्व; अथवा वह पद जिसका प्रयोग अनेक वस्तुओं के लिए समान रूप से होता है। प्लेटो ने इन्हें इंद्रियातीत लोक की सत्ताएँ माना और विशेषों को इनकी छायाएँ। अरस्तू के अनुसार ये वस्तुओं के समान गुण मात्र हैं। नामवादियों ने इन्हें केवल नाम माना है। विज्ञानवादियों के अनुसार ये मानासिक प्रत्यय मात्र हैं।

Universalism

सर्वार्थवाद, सर्वहितवाद
वह नीतिशास्त्रीय सिद्धांत कि व्यक्ति का उद्देश्य सभी के हित के लिए काम करना होना चाहिए : सर्वहित व्यक्तिगत हित से श्रेष्ठ है।

Universalistic Hedonism

सर्वसुखवाद
वह नीतिशास्त्रीय सिद्धांत कि सभी का सुख अथवा (व्यावहारिक रूप में) “अधिकतम व्यक्तियों का अधिकतम सुख” कर्म का लक्ष्य होना चाहिए।

Unscientific Induction

अवैज्ञानिक आगमन
तर्कशास्त्र में, वह आगमन जो कार्य-कारण-संबंध की वैज्ञानिक खोज पर आधारित नहीं होता बल्कि दृष्टांतों की गणना मात्र पर आश्रित होता है, जैसे “सभी कौवे काले होते हैं।”

Utilitarianism

उपयोगितावाद
विख्यात नैतिक सिद्धांत, सुखवाद का ही, वह प्रारूप जिसके अनुसार उपयोगिता नैतिक मानदंड है। मिल इसके प्रवर्तक हैं।

Validity

वैधता, प्रामाण्य
आधारवाक्य और निष्कर्ष के संबंध पर आधृत अनुमान का गुण, जिसके अनुसार यदि आधारवाक्य सत्य हो तो निष्कर्ष असत्य नहीं हो सकता।

Valid Moods

वैध विन्यास
अनुमान के प्रामाणिक आकार, जिनका निर्धारण आ, ए, ई और ओ प्रतिज्ञप्तियों को अनुमान की चारों आकृतियों में आधारवाक्य और निष्कर्ष के रूप में प्रयुक्त करने से प्राप्त होते हैं ऐसे वैध विन्यास उन्नीस हैं।

Value

मूल्य
1. आरंभिक एवम् संकुचित अर्थ में (प्लेटो) उस आदर्श अथवा उपयोगिता का द्योतक जिसका संबंध जीवन के आदर्शों से है।
2. व्यापक तथा पुर्नविवेचित अर्थ में (1900AD) मूल्यों को जीवन से संबंधित स्तरों तथा क्षेत्रों के उन समस्त संदर्भो, आदर्शों एवम् आकांक्षाओं में प्रयोग किया जाने लगा, जिनका विस्तार दैहिक, ऐन्द्रिय और जैविक धरातल से लेकर, धार्मिक, सौंदर्यात्मक तथा आध्यात्मिक धरातल तक होता है। मानव की आवश्यकता, अभीप्सा, आकांक्षा की पूर्ति करने वाले तथ्य/आदर्श। मानव इच्छा व आवश्यकताओं के अनुसार मूल्य का वर्गीकरण है।

Variable

चर
तर्कशास्त्र में, ऐसा प्रतीक जैसे : ‘X’ या (‘क’) जो किसी वस्तु-विशेष का नाम नहीं होता, बल्कि वस्तुओं के एक वर्ग के किसी भी व्यष्टि के लिए प्रयुक्त किया जा सकता है।

Venn Diagram

वेन-आरेख
अंग्रेज तर्कशास्त्री जॉन वेन द्वारा अपनाई गई चित्रण-पद्धति जिसमें वृत्तों द्वारा वर्गों और प्रतिज्ञप्तियों के पदों के संबंधों को दिखलाया जाता है। रिक्त स्थलों को छायांकित कर दिया जाता है और अरिक्त स्थलों को क्रॉस चिह्नांकित कर दिया जाता है।

Veridicity

यथातथ्य, यथार्थता
प्रत्यक्ष, स्मृति, कल्पना इत्यादि की वह विशेषता जिसके होने से वे सत्य प्रतिज्ञप्ति के आधार बनते हैं और जिसका भ्रम इत्यादि में अभाव होता है। यह विशेषता व्यवहारतः सत्यता (truth) से केवल इस बात में भिन्न होती है कि सत्यता केवल प्रतिज्ञप्तियों की विशेषता मानी जाती है।

Verification

सत्यापन
प्रतिज्ञप्तियों के सत्य या असत्य होने का निश्चय करने की क्रिया, जिस पर तार्किक प्रत्यक्षवादियों ने वाक्यों की सार्थकता के परीक्षण के लिए बल दिया है।

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