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Definitional Dictionary of Philosophy (English-Hindi) (CSTT)

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Eclecticism

संकलनवाद, संकलन-वृत्ति
वह सिद्धांत जो मौलिक न होकर विभिन्न दार्शनिक और धार्मिक संप्रदायों या तंत्रों के तत्त्वों को लेकर बनाया गया हो; अथवा ऐसे तत्वों को ग्रहण करके आत्मसात् करने की वृत्ति।

Economic Determinism

आर्थिक नियतत्ववाद
वह सिद्धांत कि आर्थिक कारकों का सामाजिक, राजनीतिक और बौद्धिक विकास पर निर्णायक प्रभाव पड़ता है। कार्ल-मार्क्स इस सिद्धांत के प्रणेता हैं।

Ecpyrosis

अग्नि प्रलय
स्टोइक दर्शन में, एक निश्चित अवधि के पश्चात् संपूर्ण सृष्टि का अग्नि में भस्मसात् हो जाना।

Ecstasy

1. भावातिरेक : तीव्र भावात्मक उत्तेजना की वह अवस्था जिसमें व्यक्ति तर्क से ऊपर उठ जाता है और आत्म-संयम खो बैठता है।
2. हर्षातिरेक, हर्षोन्माद : हर्ष या आनन्द की तीव्रता की वह अवस्था जिसमें आत्मा अपने आराध्य से तादात्म्य कर लेती है और व्यक्ति उसमें इतना लीन हो जाता है कि उसकी साधारण लौकिक चेतना लुप्त हो जाती है।

Ectypal Intelligence (=Intellectus Ectypus)

संवेदनाश्रित प्रज्ञा
कांट के दर्शन में, बुद्धि की वह शक्ति जो संवेदनों से प्राप्त सामग्री से प्रत्ययों का निर्माण करती है।

Ecumenicity

सार्वलौकिकता, सार्वदेशिकता
संपूर्ण विश्व में फैले होने का गुण। विशेषतः उन विचारों या वस्तुओं की विशेषता जो सभी ईसाईयीय संप्रदायों में अथवा अखिल विश्व की ईसानुयायी जनता में एकता लाने के प्रयोजन की पूर्ति करती है।

Ecumenics

ईसाई-समाजशास्त्र
विश्व के ईसाई मतानुयायियों के समाज की विशेषताओं, समस्याओं इत्यादि का अध्ययन करने वाला शास्त्र।

Educative Theory Of Punishment

शिक्षार्थ-दंड-सिद्धांत
सुधारात्मक दण्ड सिद्धांत का एक प्रकार जिसके अनुसार दंड का उद्देश्य शिक्षा द्वारा अपराधी का सुधार करना होता है।

Education

सद्योअनुमान, अनन्तरानुमान, अव्यवहित अनुमान
ई. ई. कान्स्टैंस जोन्स (E.E. Constance Jones)) द्वारा अव्यवहित अनुमान के लिये प्रयुक्त शब्द।
उदाहरण : सभी मनुष्य प्राणी हैं;
∴ कुछ प्राणी मनुष्य हैं।

Efficient Cause

निमित्त्त-कारण
वह चेतन कारण जिसके द्वारा कार्य सम्पन्न होता है। जैसे घड़े के उत्पादन में कुम्हार निमित्त्त कारण है।

Effluvium

निःस्यंद
भौतिक वस्तुओं से निकलने वाला एक सूक्ष्म पदार्थ जिसकी कल्पना प्राचीन यूनानी दार्शनिकों ने प्रत्यक्ष के संदर्भ में की थी और जिसे उन्होंने ज्ञानेन्द्रियों को प्रभावित करने वाला माना था।

Egocentric Particulars

अहंकेंद्रिक विशेष
देखिए “egocentric words”।

Egocentric Predicament

अहंकेंद्रिक विषमावस्था, अहंकेंद्रिक विप्रतिपत्ति
वह विषमावस्था जिसमें ज्ञाता प्रत्ययों की सीमा का अतिक्रमण नहीं कर सकता। इस स्थिति का लाभ उठाते हुए कुछ प्रत्ययवादी जैसे बर्कले आदि प्रत्ययों को ही सत्य मानते हैं तथा बाह्य वस्तुओं के स्वतंत्र अस्तित्व का निषेध करते हैं। इस सिद्धांत की स्थापना आर.पी. पेरी ने की थी।

Egocentric Words

अहंकेंद्रिक शब्द
रसल (Russell) आदि के अनुसार, वे शब्द जो वक्तासापेक्ष होते हैं। जैसे : ‘मैं’, ‘अब’, ‘यहाँ’ इत्यादि।

Egoism

1. स्वार्थवाद, स्वहितवाद : निशास्त्र में, व्यक्ति के निहित स्वार्थ को ही साध्य मानने वाला सिद्धांत।
2. अहंवाद : दर्शन में केवल अहम् को ही सत्य मानने वाला बर्कले इत्यादि विचारकों का सिद्धांत अथवा फिक्टे का यह सिद्धांत कि पराहम् निरपेक्ष अहं (“एब्सोल्यूट इगो”) ही परम सत्य है।
3. अहंता, अहंभाव : अपने को ही श्रेष्ठ समझने की वृत्ति।

Egocentric Energism

स्वार्थौन्मुख शक्तिवाद
वह मत कि व्यक्ति को शक्तियों का उपयोग पूर्णतः स्वार्थ की प्राप्ति के लिये करना चाहिए।

Egoistic Hedonism

स्वसुखवाद, स्वार्थमूल्क सुखवाद
वह मत कि स्वयं अपने सुख की प्राप्ति ही व्यक्ति का नैतिक लभ्य होना चाहिये।

Egoistic Naturalism

स्वार्थपरक प्रकृतिवाद
रॉजर्स द्वारा हॉब्स के नैतिक सिद्धांत के लिये प्रयुक्त पद। हॉब्स स्वहित को ही व्यक्ति के कर्मों का मूल अभिप्रेरक मानता है (स्वार्थवाद), और शुभ को व्यक्ति की इच्छाओं की पूर्ति का साधन मात्र समझता है (प्रकृतिवाद)।

Egological Reduction

आहमिक अपचयन, अहंमूलक अपचयन
संवृतिशास्त्र में प्रयुक्त पद। इसके अनुसार ‘स्व’ की सत्त्ता में विश्वास अथवा अविश्वास न करके अतीन्द्रियभाव रखना ही अहंमूल्क अपचयन है।

Egotism

अहंकार, अहम्मन्यता
स्वयं को बड़ा और अन्यों को तुच्छ समझने की प्रवृत्ति।
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