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Definitional Dictionary of Philosophy (English-Hindi) (CSTT)

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Pacifism

शांतिवाद
किसी समस्या को सुलझाने के लिए हिंसा और युद्ध का विरोध करने तथा शांति से काम लेने की नीति।

Paganism

पैगनवाद, पैगनमत
यहूदियों और ईसाइयों द्वारा अपने से इतर धर्मावलम्बियों, विशेषतः मूर्तिपूजकों व अनेक देवताओं को मानने वालों के लिये प्रयुक्त अपमानसूचक (अवमाननासूचक) मत।

Palingenesis

पुनर्जन्म, देहान्तरण
जीवात्मा का एक शरीर के बाद दूसरे में प्रकट होना।

Panentheism

निमित्तोपादानेश्वरवाद
वह मत कि ईश्वर विश्व का निमित्त और उपादान कारण है। वह विश्व में व्याप्त भी है और विश्वातीत भी है। सर्वप्रथम इस मत का प्रयोग क्राउजे ने किया।

Panlogism

सर्वबुद्धिवाद
हेगेल का यह सिद्धांत कि जो सत् है वह बौद्धिक है और जो बौद्धिक है वह सत् है : बुद्धि को परमतत्व मानते हुए विश्व को बुद्धिमय मानने वाला मत।

Panobjectivism

सर्वयथार्थवाद
ज्ञानमीमांसीय यथार्थवाद का एक उत्कट रूप जो ज्ञान की समस्त वस्तुओं को वास्तविक मानता है, भले ही ज्ञान मिथ्या हो।

Panpneumatism

सर्वप्राणवाद
जर्मन दार्शनिक वॉन हार्टमन (Von Hartmann) द्वारा हेगेल के सर्वबुद्धिवाद और शोपेनहावर के सर्वसंकल्पवाद में समन्वय करने का प्रयास। तदनुसार वास्तविकता अचेतन संकल्प और अचेतन बुद्धि दोनों का संयुक्त रूप है।

Pan-Psychism

सर्वचित्तवाद
वह मत कि सभी जड़ वस्तुएँ तथा प्रकृति चेतना से युक्त हैं। यह व्हाइटहेड आदि का मत है।

Pan-Satanism

सर्वासुरवाद
वह विश्वास कि विश्व शैतान की रचना है अथवा आसुरी शक्तियों की अभिव्यक्ति है।

Pansomatism

सर्वकायवाद
वह मत कि विस्व की प्रत्येक आत्मा एक शरीर या देह है तदनुसार आत्मा और देह का अभेद है।

Pantheism

सर्वेश्वरवाद
स्पिनोजा, फेक्नर आदि के मतानुसार ईश्वर विश्वव्यापी सत्ता है।

Pantheistic Personalism

सर्वेश्वरवादी व्यक्तिवाद
संपूर्ण सत्ता को व्यक्तिरूप माननेवाला और विश्व की वस्तुओं और जीवों को इस महाव्यक्ति के अंग मानने वाला सिद्धांत।

Paradigma

प्रतिमान
प्लेटो के प्रत्ययों की दृश्य जगत् की वस्तुओं के संबंध में एक विशेषता को प्रकट करने वाला शब्द : प्लेटो ने इंद्रियातीत प्रत्ययों का एक जगत् माना है और उन्हें दृश्य-जगत् की वस्तुओं के लिए आदर्श बताया है, जिनकी वे अपूर्ण प्रतिलिपियाँ हैं।

Paradox

विरोधाभास
तर्कशास्त्र में अनुमान की वह स्थिति जब सत्य रूप में स्वीकृत आधारवाक्य से वैध निगमन द्वारा ऐसा निष्कर्ष प्राप्त किया जाता है जो आधारवाक्य को असत्य दर्शाता है। जैसे : यह कथन कि “मैं असत्य बोलता हूँ।”

Parallelism

समानान्तरवाद
स्पिनोजा के अनुसार मन और शरीर के संबंध के बारे में प्रस्तुत एक सिद्धांत, जिसके अनुसार प्रत्येक मानसिक क्रिया के समानान्तर एक शारीरिक क्रिया होती है, परन्तु उनके मध्य कोई कारणात्मक संबंध नहीं होता।

Paralogism

तर्काभास
सामान्यतः एक दोषपूर्ण न्यायवाक्य या तर्क, जिसके दोष का ज्ञान उसका प्रयोग करने वाले को नहीं होता, और इसलिए जिसका प्रयोग दूसरे को धोखा देने के उद्देश्य से नहीं किया जाता। विशेषतः कांट के द्वारा उन दोषपूर्ण युक्तियों के लिए प्रयुक्त जो आत्मा को एक द्रव्य, निरवयव और नित्य सिद्ध करने के लिए प्रस्तुत की जाती है।

Partial Inversion

आंशिक विपरिवर्तन
एक प्रकार का अव्यवहित अनुमान जिसमें निष्कर्ष का उद्देश्य मूल प्रतिज्ञप्ति के उद्देश्य का व्याघातक होता है और उसका विधेय वही रहता है जो मूल प्रतिज्ञप्ति का है।
उदाहरण : सभी उ वि हैं;
∴ कुछ अ-उ वि नहीं हैं।

Particular

विशेष
1. बौद्ध-दर्शन का एक पारिभाषिक शब्द जिसके अनुसार केवल ‘स्व-लक्षण’ वस्तुएँ ही एकमात्र सत्य है। इसके विपरीत ‘सामान्य लक्षण’ एक कल्पना-मात्र है।
2. न्याय-वैशेषिक दर्शन ने ‘विशेष’ को एक पदार्थ के रूप में स्वीकार किया है, जिसके अनुसार ‘विशेष’ केवल सामान्यों से ही पृथक नहीं है वरन् एक विशेष की अन्य विशेषों से भी पृथक् विशिष्टता है। ‘विशेष’ पदार्थ केवल भौतिक परमाणुओं पर ही लागू नहीं होता, बल्कि भौतिक परमाणुओं के समान आत्माओं (souls) पर समान रूप से लागू होता है।
3. द्वैतवादी मध्वाचार्य ने भी ‘ विशेष’ (भेद) पर टिप्पणी की है, जिसके अनुसार न केवल एक वस्तु दूसरी वस्तु से भिन्न है, वरन् वह भिन्नता अन्य सभी वस्तुओं की भिन्नताओं से भी भिन्न है।
4. पाश्चात्य दर्शन में प्लेटो एवं कांट के दर्शन में ‘विशेष’ एक महत्वपूर्ण प्रत्यय है जो ‘सामान्य’ का विलोम है।

Particular Proposition

अंशव्यापी प्रतिज्ञप्ति
पारंपरिक पाश्चात्य तर्कशास्त्र में, वह प्रतिज्ञप्ति जिसमें उद्देश्य उसके पूरे वस्त्वर्थ में ग्रहण नहीं किया जाता, जैसे, ‘कुछ पशु मांसभक्षी हैं।’ इसका विलोम ‘सर्वव्यापी प्रतिज्ञप्ति’ है जिसमें उद्देश्य उसके पूरे वस्त्वर्थ में ग्रहण किया जाता है। जैसे, सभी मनुष्य मरणशील हैं।

Particulate

कणाकार
कोई भी वस्तु जो कण के आकार की होती है, उसे कणाकर कहते हैं। उदाहरण के लिए भारतीय दर्शन के वैशेषिक दर्शन में परमाणुओं को विशेष के नाम से अभिहित किया जाता है। सभी भौतिक परमाणुओं को ‘कणाकार’ कहा जा सकता है।
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